Thursday, 26 December 2013

मेरे हालत

 मेरे हालत आज मेरे खिलाफ हो  गये
 मेरे अपने किसी ओर के साथ हो गये
 किसी को खबर क्या दर्द क्या होता है ,
 नसीब के तारे ना जाने कहाँ खो गये।

 कश्तियाँ  डूबी मांझी से जाकर पूंछो
 जिंदगी कैसे लुटी मेरे हमराह से पूंछो
 राह के फासले इतने बड़ा दिए उसने ,
 मंजिल न मिले तो मंजिल से पूंछो।

 जब बेहोश थे हर पल साथ था तेरा
 बैठे थे तो उठाने का प्रयाश था तेरा
 जब खड़े हुये  चलने  को साथ तेरे ,
 तब बहुत दूर से खड़ा हाथ था तेरा। 

" जय कुमार "

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