Friday, 27 December 2013

मेरी जिद

मेरी जिद है तुजपर मर मिटने की।
तेरी जिद है खुदपर मर मिटने की। 
हम दोनों कि राहे अलग अलग है ,
पर दोनों कि जिद है मर मिटने की।


मेरी तेरी कहानी को  नाम  क्या दे।
अहसास जिन्दा है पहचान क्या दे।
मुजमें तू जिन्दा है तुजमे मै  नहीं ,
फिर इस रिश्ते को अंजाम क्या दे।


मेरी  मजबूरी  ये  नहीं  कि  तू  दूऱ है।
मेरी मजबूरी ये नही कि तू मजबूर है।
लोग लांखो मिलते ज़माने कि राहों में ,
मेरी मजबूरी दिल को सिर्फ तू मंजूर है।   

जब  मेरी  हरेक  साँस पर नाम  तेरा है । 
जब  मेरी  हरेक  चीज पर  हक़ तेरा  है । 
क्यों ना सारे बंधन तोड़  एक हो जाएँ हम  ,
अब तो मेरी रूह पर भी सिर्फ हक़ तेरा है ।

"जय कुमार "



   

No comments:

Post a Comment