ना जाने अब वो शहर कैँसा होगा ।
ना जाने अब मेरा रब कैँसा होगा ।
वक्त की डाल से मैँ टूटा हूँ दोस्तोँ ,
ना जाने हवाओँ का रुख कैँसा होगा ।।
"जय कुमार" 29/11/2013
ना जाने अब मेरा रब कैँसा होगा ।
वक्त की डाल से मैँ टूटा हूँ दोस्तोँ ,
ना जाने हवाओँ का रुख कैँसा होगा ।।
"जय कुमार" 29/11/2013
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