परिवार आज बँट रहे , अपने अपने काम ।
समाज आज बदल चुका , अपने अपने राम ।
अपने अपने राम , धर्म के अब दंगल होवे ।
राह - राह पर खून , मनुज मनुजता खोवे ।।
समाज आज बदल चुका , अपने अपने राम ।
अपने अपने राम , धर्म के अब दंगल होवे ।
राह - राह पर खून , मनुज मनुजता खोवे ।।
"जय कुमार"27/5/15
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