मेरे हालत आज मेरे खिलाफ हो गये
मेरे अपने किसी ओर के साथ हो गये
किसी को खबर क्या दर्द क्या होता है ,
नसीब के तारे ना जाने कहाँ खो गये।
कश्तियाँ डूबी मांझी से जाकर पूंछो
जिंदगी कैसे लुटी मेरे हमराह से पूंछो
राह के फासले इतने बड़ा दिए उसने ,
मंजिल न मिले तो मंजिल से पूंछो।
जब बेहोश थे हर पल साथ था तेरा
बैठे थे तो उठाने का प्रयाश था तेरा
जब खड़े हुये चलने को साथ तेरे ,
तब बहुत दूर से खड़ा हाथ था तेरा।
" जय कुमार "
मेरे अपने किसी ओर के साथ हो गये
किसी को खबर क्या दर्द क्या होता है ,
नसीब के तारे ना जाने कहाँ खो गये।
कश्तियाँ डूबी मांझी से जाकर पूंछो
जिंदगी कैसे लुटी मेरे हमराह से पूंछो
राह के फासले इतने बड़ा दिए उसने ,
मंजिल न मिले तो मंजिल से पूंछो।
जब बेहोश थे हर पल साथ था तेरा
बैठे थे तो उठाने का प्रयाश था तेरा
जब खड़े हुये चलने को साथ तेरे ,
तब बहुत दूर से खड़ा हाथ था तेरा।
" जय कुमार "
jjj
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