भैया चले ससुराल , खायें मुफत को माल ।
बात पे रोव दिखावे , बदल गई अब चाल ।
बदल गई अब चाल , खाके माल पेट पटे ।
फूल गये अब गाल , ठाट बाट से दिन कटे ।
"जय कुमार" 27/08/14
बात पे रोव दिखावे , बदल गई अब चाल ।
बदल गई अब चाल , खाके माल पेट पटे ।
फूल गये अब गाल , ठाट बाट से दिन कटे ।
"जय कुमार" 27/08/14
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