Mere Bhav
Tuesday, 2 September 2014
"हाइकू"
टूटा बंधन
छण में भाव हीन
रिश्तों की दाताँ
डाल से पत्ता
उड़ चला जो टूटा
कहाँ ठिकाना
पुष्प थे खिले
भौँरो का था भ्रमण
वक्त बदला
कौआ कोयल
एक रंग में मिलें
बोली अलग
बुरा से अच्छा
कोयल कुटिलता
कौआ निर्मल
दिखाता जैसा
मन वैसा ना होता
डंक दो होते
"जय कुमार"
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