Tuesday, 2 September 2014

खिलते मुरझाते

खिलते मुरझाते फिर मचलते रिश्ते ।
गम के सागर में लाश बन तैरते रिश्ते ।
फर्ज कर्ज सब भुला दिया खुदगर्जी में ,
गिरगिट की तरह रंग बदलते रिश्ते ।।

"जय कुमार"31/08/14

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