Sunday, 28 September 2014

तुमसे ही मेरा

तुमसे ही मेरा हर काज है ।
तुमसे ही मेरी यहाँ लाज है ।
इस मिटने वाले जीवन में ,
तुमसे ही मेरा यहाँ ताज है ।
क्यों रुठ जाते हो यूँ पल में ।
क्यों डरते हो यूँ हलचल में ।
आज में जीना सीख लो यार ,
क्यों जीते हो अब यूँ कल में । ।
आज ही तो होता हमारा है ।
भूत तो दुखों का पिटारा है ।
प्रयास कर सच्चे मन से तु ,
भविष्य राज तो तुम्हारा है ।।
हर दर्द को अलविदा करदे ।
यादों के ढ़ाचे को जुदा करदे ।
जीता जा खुदमें यार मेरे अब,
अपने ह्रदय को खुदा करदे ।।
मन मीत अब बनकर रहेंगे ।
हर गम हम मिलकर सहेगे ।
तूफाँ आये अँधेरा हो गहरा ,
संघर्ष पथ पे चलकर रहेंगे ।।
"जय कुमार" 17/09/14

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