खुद की हिम्मत को झाँककर देख ।
खुद से ज्यादा कुछ माँगकर देख ।
हिमालय भी सर झुकायेगा दोस्त ,
अपनी सीमाओं को लाँगकर देख ।।
खुद से ज्यादा कुछ माँगकर देख ।
हिमालय भी सर झुकायेगा दोस्त ,
अपनी सीमाओं को लाँगकर देख ।।
संकीर्ण सीमा से निकलकर देख ।
व्यापक धरातल पर चलकर देख ।
अनन्त पर पुँहुच जायेगा ए दोस्त
विश्वास की लंबाई नापकर देख ।।
"जय कुमार"24/09/14
व्यापक धरातल पर चलकर देख ।
अनन्त पर पुँहुच जायेगा ए दोस्त
विश्वास की लंबाई नापकर देख ।।
"जय कुमार"24/09/14
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