जख्मो पर जवानी आई है ।
यादों पर रवानी आई है ।
नकाब उठा यादों का फिर,
याद कोई कहानी आई है ।।
यादों पर रवानी आई है ।
नकाब उठा यादों का फिर,
याद कोई कहानी आई है ।।
मुद्दतों से जख्म सोये रहे ।
रश्मों रिवाजो पे रोये रहे ।
खड़े है दिल के दवाजे पर ,
नकामी से अपनी खोये रहे ।
"जय कुमार" 17/09/14
रश्मों रिवाजो पे रोये रहे ।
खड़े है दिल के दवाजे पर ,
नकामी से अपनी खोये रहे ।
"जय कुमार" 17/09/14
No comments:
Post a Comment