Tuesday, 20 October 2015

अंतर्मन में

अंतर्मन में मद मस्त हो जा !
अंतस की गहराई में सो जा !
खुली खिताब पड़े दुनिया ये ,
मैं में रमकर तू मैं में खो जा !!
"जय कुमार"15/10/15

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