Tuesday, 20 October 2015

कहीं मिले

कहीं मिले कहीं फरियाद से रहे ।
वो जखम गहरे आबाद से रहे ।
मिलन की तमन्ना जिंदा रही दिल में
भूले बिसरे ख्वाव याद से रहे ।
यूँ तो सबकुछ पाया जिन्दगी से ,
बिन उसके हरपल बर्बाद से रहे ।
"जय कुमार"10/10/15

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