उजड़ने की सूरत पाये बहारोँ से ।
दरद के सैलाब .. आये सहारों से ।
प्यार को ढ़ूढ़ते रहे उम्र- ए- हयात ,
खुशी इक से न मिली गम हजारोँ से ।
मोहब्बत किरदार से सब जमाने में ,
नजरे मिली कहाँ दिल के नजारों से ।
उम्मीद रखता हूँ भरोसा जिंदा है ,
भँवर में फँस गया प्यार किनारों से ।
टूटे दिल के सहारे मिलते गर ये कहीं ।
खरीद लेता इक दिल फिर बाजारों से ।।
"जय कुमार"23/10/15
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