चीरकर सीना मुश्किलों का ,
चलने का दम रखता हूँ ।
गरल पीकर भी जिन्दगी में,
हँसने का दम रखता हूँ ।
काल के कहर झेलकर जिये
डरा नहीं नियति से कभी ,
काली रात की आँधिओं में ,
जलने का दम रखता हूँ ।।
चलने का दम रखता हूँ ।
गरल पीकर भी जिन्दगी में,
हँसने का दम रखता हूँ ।
काल के कहर झेलकर जिये
डरा नहीं नियति से कभी ,
काली रात की आँधिओं में ,
जलने का दम रखता हूँ ।।
"जय कुमार"4/10/15
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