हौसलों के पंख लगाकर उड़ जाऊँगा ।
संघर्षो को पैर बनाकर ..बढ़ जाऊँगा ।
दुर्गम हिमालय जो मेरा .. पथ रोकेगा ,
संकल्पो की डोर बाँधकर चढ़ जाऊँगा ।।
संघर्षो को पैर बनाकर ..बढ़ जाऊँगा ।
दुर्गम हिमालय जो मेरा .. पथ रोकेगा ,
संकल्पो की डोर बाँधकर चढ़ जाऊँगा ।।
"जय कुमार"25/10/15
No comments:
Post a Comment