Tuesday, 20 October 2015

हर तरफ

हर तरफ एक ही ,,,,,,,,,,मंजर देखा है !
खिले फूलों पर ,,,,,,,,,,,, खंजर देखा है !!

फसल प्यार की जहां उगा करती थी ,
उसी जमीन को ,,,,,,,,,,,,,बंजर देखा है !

मुखौटा लगाकर ,,,,,,,,,,,घूम रहा है तू ,
दिखता नहीं जो ,,,,,,,,,,,,अंदर देखा है !

उछल कूंद अभिमान में ,,,,,,,करता तू ,
रूप आदमी में,,,,,,,,,,,,,,,, बंदर देखा है !

किसान की लड़की ,,,,,,,जवान हुई है ,
पिता के दिल में, ,,,,, , बबंडर देखा है !

हमेशा खुश मैं ,,,,,,,,रखता हूं उसको ,
आंखों में उसके ,,,,,,,,,समुंदर देखा है !
 
इतना मुस्कराता है ,,,,,,,,,महफिल में ,
दिल में खुशी का,,,,,,,, खंडर देखा है !!


"जय कुमार"27/09/15

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