आशा किरण
चीरती अंधेरे को
संबल देती
किसी कोने में
दबी चिंगारी से ही
दहकी आग
स्वर्ण परीक्षा
दहकते अंगारों
में ही होती है
पवन वेग
पेड़ तो हिला देता
पर्वत नहीं
घोर अँधेरे
से मनुज हिलता
साहस नहीं
सूर्य कि चाल
सदैव समान है
तेज बदला
चाँद अथिति
कुछ दिनों का फिर
अँधेरा होता
साहस आशा
प्रेम बंधुत्व होता
जीवन मूल
"जय कुमार" 7/7/14
चीरती अंधेरे को
संबल देती
किसी कोने में
दबी चिंगारी से ही
दहकी आग
स्वर्ण परीक्षा
दहकते अंगारों
में ही होती है
पवन वेग
पेड़ तो हिला देता
पर्वत नहीं
घोर अँधेरे
से मनुज हिलता
साहस नहीं
सूर्य कि चाल
सदैव समान है
तेज बदला
चाँद अथिति
कुछ दिनों का फिर
अँधेरा होता
साहस आशा
प्रेम बंधुत्व होता
जीवन मूल
"जय कुमार" 7/7/14
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