कीचड़ के कमल महलो में खिल गये ।
महलों के पुष्य अब कीचड़ से मिल गये ।
बदला रुख हवाओं ने दौर बदल गया ,
माहौल के हिसाब से हंस भी ढल गये ।
मजबूत इरादे भी ईमान के हिल गये ।
खूबसूरत दिखते रास्तो पर चल गये ।
सब ताक में बैठे पेट जेब भरने के लिए ,
बेमानी ना मिली ईमानदार निकल गये ।
"जय कुमार"22/07/14
महलों के पुष्य अब कीचड़ से मिल गये ।
बदला रुख हवाओं ने दौर बदल गया ,
माहौल के हिसाब से हंस भी ढल गये ।
मजबूत इरादे भी ईमान के हिल गये ।
खूबसूरत दिखते रास्तो पर चल गये ।
सब ताक में बैठे पेट जेब भरने के लिए ,
बेमानी ना मिली ईमानदार निकल गये ।
"जय कुमार"22/07/14
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