Friday, 11 July 2014

भुनसारे से

भुनसारे से सकारे से सकारे से
काहे उड़ा दई चादरिया चादरियाँ
मोहे बतादे ते बाबर्रिया
काहे उड़ा दई चादरिया

भुनसारे से सकारे से सकारे से . . .

काल तलक तो संगे रओ
दिनभर खूबई बुलयाओ
भुनसारे ऐसों का हो गयो
जल्दई बतादे साँवर्रिया
काहे उड़ा दई चादरिया . . .

भुनसारे से सकारे से सकारे से . . .

दोपहरी में संगे रोटी खाई
बच्चन के संग खेलत रई
अब काहे मो लटकाये बैठो
मोहे सुनादे अब साँवर्रिया
काहे उड़ा दाई चादर्रिया

भुनसारे से सकारे से सकारे से . . .

मोसे कोनऊ गलती हो गई
जा बिटिया काहे को रो रई
सबर बदना टूटत जा रओ
सच्ची बता दे ते साँवरिया
काहे उड़ा दई चादरिया

भुनसारे से सकारे से सकारे से . .

गाँव भर जो काहे जुर रओ
मोरी बातें हर कोऊ कर रओ
ऐसो का अब अंधेर हो गयो
मोहे बता दे ते साँबरिया
काहे उड़ा दई चादरिया

भुनसारे से सकारे से सकारे से . . .

"जय कुमार" 10/07/14

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