दबे जज्वातों की यूँ
हिफाजत ना कर ।
बिखर जाने दे छिपाने की
हिमाकत ना कर ।
बहा दे दरिया गम का
समुंदर से जा मिले ,
आँखों में बसे आँसुयों को
हिरासत ना कर ।
"जय कुमार"24/07/14
हिफाजत ना कर ।
बिखर जाने दे छिपाने की
हिमाकत ना कर ।
बहा दे दरिया गम का
समुंदर से जा मिले ,
आँखों में बसे आँसुयों को
हिरासत ना कर ।
"जय कुमार"24/07/14
No comments:
Post a Comment