Friday, 25 July 2014

दबे जज्वातों

दबे जज्वातों की यूँ
हिफाजत ना कर ।
बिखर जाने दे छिपाने की
हिमाकत ना कर ।
बहा दे दरिया गम का
समुंदर से जा मिले ,
आँखों में बसे आँसुयों को
हिरासत ना कर ।

"जय कुमार"24/07/14

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