
पीकर खुद जहर अमृत बने जमाने को तुम ,
हर पल नेकी उपकार में बिताया है तुमने ।
बिरोधी हो जायेंगे सहमत एक दिन जरुर ,
दुश्मन को भी महफिल में बुलाया है तुमने ।
अपने आप को जलाकर उजाला करने वाले ,
तन मन धन को सच पर लगाया है तुमने ।
कर्म पथ चलने में मुसीबत जलवा दिखाती ,
आँधियों के दौर में दीपक जलाया है तुमने ।
एक दिन आयेगा आकाश झुक जायेगा तुमेँ ,
आदर्श पथ पे चलकर फूल खिलाया है तुमने ।
जिंदगी जो हिसाब पूछने लगे नेकी वदी का ,
दिखा देना जो जीवन भर कमाया है तुमने ।
जमाने याद करेंगे तुमको अपने इतिहास में ,
प्रेम की खुशवु से जो चमन सजाया है तुमने ।
"जय कुमार "25/08/14
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