
ह्रदय में खामोशी छाई है ,
भावों का दरिया सूख गया ।
हाथों में लहराती तलवारें ,
मानवता का बंधन टूट गया ।
वासनाओं की आँधी आई है ,
रिस्तों का भरोसा टूट गया
युग का ये कौनसा पड़ाव है ,
इंसान को इंसान लूट गया ।
खामोश हुआ जीवन स्पंदन ,
साँसो से ह्रदय जब रुठ गया ।।
"जय कुमार"20/08/14
भावों का दरिया सूख गया ।
हाथों में लहराती तलवारें ,
मानवता का बंधन टूट गया ।
वासनाओं की आँधी आई है ,
रिस्तों का भरोसा टूट गया
युग का ये कौनसा पड़ाव है ,
इंसान को इंसान लूट गया ।
खामोश हुआ जीवन स्पंदन ,
साँसो से ह्रदय जब रुठ गया ।।
"जय कुमार"20/08/14
No comments:
Post a Comment