Friday, 8 August 2014

हौंसलों को पर

हौंसलों को पर दिया करो ।
कभी अपने को जिया करो ।

जिंदगी जीना हो सम्मान से ,
थोड़ा थोड़ा ही पिया करो ।

खूब रंज पाले हो दिल में ,
बेवजह ही हँस लिया करो ।

जिससे मिले दिल को सुकूँ ,
काम वो भी कर लिया करो ।

चिराग अँधेरे से हारते नहीं ,
एक चिराग जला लिया करो ।

मौसम की रवानी को देखके ,
बूँदों में ही भीग लिया करो ।

जो दिल ना दे गवाही यार ,
काम हरगिज ना किया करो ।

रंग बदलती दुनिया में अब ,
एक पहचाँ बना लिया करो ।

इश्क याद आये महफिल में ,
अपने अश्क छुपा लिया करो ।

मुहब्बत की गैरत मर जाये ,
जज्जवात दबा लिया करो ।

गुल्सिता को हो जरुरत तेरी ,
हँसते हुए कुर्बानी दिया करो ।

सारे गमों को कह अलविदा ,
जिंदा दिली से जिया करो ।

"जय कुमार" 06/08/14

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