
भारत माँ के श्री चरणो में ,
सादर शीश झुकाता हूँ ।
बलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
झाँसी की रानी मरदानी ।
तलवारो से लिखे कहानी ।
महल छोड़ रण में लड़ती थी ।
दुश्मन पर भारी पड़ती थी ।
प्राणो की बलि देने वाली ।
स्वराज आग जलाने वाली ।
भारत का स्वाभिमान है जो ,
रानी कि गाथा गाता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
भगत सिंह से वीर हमारे ।
आजादी के थे मतवारे ।
स्वराज्य से यारी करते थे ।
दिल से वतन पर मरते थे ।
चड़ फाँसी विदा हो गये वो ।
अमर अमिट नाम कर गये वो ।
शहीद वीर भगत सिंह जी को ,
श्रध्दा सुमन चढ़ाता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
चलि हवा जब दुराचार की ।
अहिंसा का तब मसिहा आया ।
एक देश एक आवाज बनि तब ।
सत्याग्रह की बात चली जब ।
लिखी गई एक नई कहानी ।
देश ने देखी तब जवानी ।
तिरंगे को सम्मान मिल गया ,
स्वराज की बात बताता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
कोई उत्तर कोई दक्षिण का ।
कोई पूरब कोई पश्चिम का ।
कोई तमिल कोई हिंदी का ।
कोई भेद ना सारे हिंद का ।
सबने अपना लहु बहाया ।
भुला दिया गया उनका साया ।
इतिहास भुला रहा जिनको ।
मैं उनको शीश नभाता हूँ
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
लाखों शहीदों कि आजादी ।
सम्भाल के रख न कर बर्बादी ।
लोकतंत्र को घुन न लगा अब ।
खुदगर्जी से ऊपर उठ अब ।
अपने वतन को देखो भाई ।
आपस में ना करो लड़ाई ।
जो ना माने हार काल से ,
उन वीरो कि गाथा गाता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
भारत माँ के श्री चरणों में ,
सादर शीश झुकाता हूँ ।
वलिदानो की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
"जय कुमार"14/08/14
बलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
झाँसी की रानी मरदानी ।
तलवारो से लिखे कहानी ।
महल छोड़ रण में लड़ती थी ।
दुश्मन पर भारी पड़ती थी ।
प्राणो की बलि देने वाली ।
स्वराज आग जलाने वाली ।
भारत का स्वाभिमान है जो ,
रानी कि गाथा गाता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
भगत सिंह से वीर हमारे ।
आजादी के थे मतवारे ।
स्वराज्य से यारी करते थे ।
दिल से वतन पर मरते थे ।
चड़ फाँसी विदा हो गये वो ।
अमर अमिट नाम कर गये वो ।
शहीद वीर भगत सिंह जी को ,
श्रध्दा सुमन चढ़ाता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
चलि हवा जब दुराचार की ।
अहिंसा का तब मसिहा आया ।
एक देश एक आवाज बनि तब ।
सत्याग्रह की बात चली जब ।
लिखी गई एक नई कहानी ।
देश ने देखी तब जवानी ।
तिरंगे को सम्मान मिल गया ,
स्वराज की बात बताता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
कोई उत्तर कोई दक्षिण का ।
कोई पूरब कोई पश्चिम का ।
कोई तमिल कोई हिंदी का ।
कोई भेद ना सारे हिंद का ।
सबने अपना लहु बहाया ।
भुला दिया गया उनका साया ।
इतिहास भुला रहा जिनको ।
मैं उनको शीश नभाता हूँ
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
लाखों शहीदों कि आजादी ।
सम्भाल के रख न कर बर्बादी ।
लोकतंत्र को घुन न लगा अब ।
खुदगर्जी से ऊपर उठ अब ।
अपने वतन को देखो भाई ।
आपस में ना करो लड़ाई ।
जो ना माने हार काल से ,
उन वीरो कि गाथा गाता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
भारत माँ के श्री चरणों में ,
सादर शीश झुकाता हूँ ।
वलिदानो की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।
"जय कुमार"14/08/14
No comments:
Post a Comment