Wednesday, 27 August 2014

मन में पाप

मन में पाप छुपा रखें , जग खो भाषण देत ।
मीठी वाणी बोल के , सब अपनो कर लेत ।
सब अपनो कर लेत , लूट हथियार के बिना ।
नाम राम को लेत , बने बैरागी धन गिना ।
धर्म शास्त्र की बात करे , करते काले काम ।
कलयुग की जा माया , बिकते हर दिन राम ।
बिकते हर दिन राम , हाट खोल बैठे भगत ।
धरम करें बदनाम , अंधो बनो देखत जगत । 
पुण्य पाप कि बातन से , हमें तुमे डरात ।
हम तुम उपवास करें , खुद मलाई खात ।
खुद मलाई खात , दूध दोहन अपन करें ।
परिश्रम अपनो होत , वे अपनी कोठी भरें ।।

"जय कुमार" 22/08/14

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