Tuesday, 5 August 2014

ये तेरा आसियाना

ये तेरा आसियाना है जो
फूलों से घिरा ठिकाना है जो
खूबसूरत जमाने के सपने
फँसा इसमें दीवाना है जो
मिलकियत तेरी बस पानी है
एक दिन तो इसे बह जानी है
सोहरत में डूब गया इतना तू
यह पल दो पल की कहानी है
जाति धर्म के फंदो में फँसा
रंग रुप के इन कुंदो में फँसा
इस तन की विसात क्या है
चार दिन के चिन्हो में फँसा
रजनी भोर की निशानी है
भोर रजनी की कहानी है
दोपहर के सूर्य की रोशनी
साँझ आने पर पुरानी है

"जय कुमार"01-08-14

No comments:

Post a Comment