जख्म बहुत खाये है जमाने के पीठ पर ,
ह्रदय पर आघात हो तो कुछ बात बने ।
जुल्म बहुत ढाये है हमपर इस जमाने ने ,
तेरी मेरी एक जात हो तो कुछ बात बने ।
"जय कुमार" 21/08/14
ह्रदय पर आघात हो तो कुछ बात बने ।
जुल्म बहुत ढाये है हमपर इस जमाने ने ,
तेरी मेरी एक जात हो तो कुछ बात बने ।
"जय कुमार" 21/08/14
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