Friday, 7 March 2014

साँस,नब्ज,धड़कन

साँस,नब्ज,धड़कन का खेल है जिँदगी ।
दिन , रात , शाम , का मेल है जिँदगी ।
वो पाकर गरीब , कुछ खोकर अमीर हैं ,
आत्मा , मन , तन का मेल है जिंदगी ।।

कल की बात थी जीवन रवानी पर था ।
हर बात थी छोटी दिल वेईमानी पर था ।
नेकी बदी का किसको था ख्याल तब ,
खून उबल रहा था मन जवानी पर था ।

अब सामने अतीत ने पैर पसारे है आज ।
तेरे अपने ही तुझको अब बिसारे है आज ।
पैर थक चुके है अब आँखो में धुंधलापन ,
अतीत के वो सारे पन्ने अब हमारे है आज ।।

" जय कुमार " 23/02/2014

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