मेरी उम्मीद से भी तुम कहीं ज्यादा निकले ,
वेवफा समझते थे तुम तो मेरे कातिल निकले ।
धोका मिला उनसे जिनसे आस थी वफा की ,
वो मझधार के तिनके ही मेरे साहिल निकले । ।
कभी खंजर की चोट ने दर्द ना दिया मुझको ,
मेरी मुहब्बत के फफोले ही कातिल निकले ।
गँवार कहकर पुकारा जमाने ने जिनको ,
वो सब शख्स वफाओं के फाजिल निकले ।
"जय कुमार" 21/02/2014
वेवफा समझते थे तुम तो मेरे कातिल निकले ।
धोका मिला उनसे जिनसे आस थी वफा की ,
वो मझधार के तिनके ही मेरे साहिल निकले । ।
कभी खंजर की चोट ने दर्द ना दिया मुझको ,
मेरी मुहब्बत के फफोले ही कातिल निकले ।
गँवार कहकर पुकारा जमाने ने जिनको ,
वो सब शख्स वफाओं के फाजिल निकले ।
"जय कुमार" 21/02/2014
No comments:
Post a Comment