जीवन जब संघर्ष , कहकर क्योँ रोते हो ।
जीना जब मजबूरी , मजबूर क्योँ होते हो ।
जब तक साँसो की आबाजाही खेल तब तक ,
रंगमंच , फिर झूठा अभिनय क्योँ करते हो । ।
"जय कुमार" 27/02/2014
जीना जब मजबूरी , मजबूर क्योँ होते हो ।
जब तक साँसो की आबाजाही खेल तब तक ,
रंगमंच , फिर झूठा अभिनय क्योँ करते हो । ।
"जय कुमार" 27/02/2014
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