दिल को समझाया मगर बेकरार हो गया ।
रफ्तां रफ्तां मुझे तुझसे प्यार हो गया ।
आ भी जाओ अब मेरे आँगन में प्रिय ,
बहुत ज्यादा अब इंतजार हो गया ।
मेरा दोस्त बनकर आया था तु ,
मेरी जिंदगी का अब यार हो गया ।
घूंघट मेँ चांद छुपा था कोई ,
आज उसका मुझे दीदार हो गया ।
लिखता होगा कोई नसीबा जरुर ,
रब पर मुझे ऐतबार हो गया ।
"जय कुमार " 21/03/2014
रफ्तां रफ्तां मुझे तुझसे प्यार हो गया ।
आ भी जाओ अब मेरे आँगन में प्रिय ,
बहुत ज्यादा अब इंतजार हो गया ।
मेरा दोस्त बनकर आया था तु ,
मेरी जिंदगी का अब यार हो गया ।
घूंघट मेँ चांद छुपा था कोई ,
आज उसका मुझे दीदार हो गया ।
लिखता होगा कोई नसीबा जरुर ,
रब पर मुझे ऐतबार हो गया ।
"जय कुमार " 21/03/2014
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