Friday, 7 March 2014

कर्म , धर्म

कर्म , धर्म , मर्म को समझता चल ।
अर्स , फर्स , उत्कर्ष को देखता चल ।
यह जीवन नाव , सदा मझधार मेँ ,
अपनत्व,सतत्व, प्रभुत्व से मिलता चल ।

"जय कुमार" 25/02/2014

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