Thursday, 13 March 2014

कुछ बात बने

राम रहीम का मेल हो तब , कुछ बात बने ।
मिल जुल कर रहे हम तब , कुछ बात बने ।

कब तक यों अपनो से लड़ोगे मेरे देश वासियोँ ,
उँच नीच की दीवारे टूटे तब , कुछ बात बने ।

गले सदियों से मिलते हम जमाने के सामने , 
जब हमारे दिल मिलें , तब कुछ बात बने ।

तेरे आने पर चेहरा मुस्कराये मन चुप रहता ,
मन के तार खिलखिलाये , तब कुछ बात बने ।

टूटी को जोड़े , जुड़ी को करे हम और मजबूत ,
बिखरी पन्खुड़ियाँ से फूल बने , कुछ बात बने ।

हवाओं में नफरत का जहर अब बहुत घुल चुका ,
फिजाओं में नेकी की खुशबू घुले , कुछ बात बने ।

"जय कुमार 07/03/2014

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