राम रहीम का मेल हो तब , कुछ बात बने ।
मिल जुल कर रहे हम तब , कुछ बात बने ।
कब तक यों अपनो से लड़ोगे मेरे देश वासियोँ ,
उँच नीच की दीवारे टूटे तब , कुछ बात बने ।
गले सदियों से मिलते हम जमाने के सामने ,
जब हमारे दिल मिलें , तब कुछ बात बने ।
तेरे आने पर चेहरा मुस्कराये मन चुप रहता ,
मन के तार खिलखिलाये , तब कुछ बात बने ।
टूटी को जोड़े , जुड़ी को करे हम और मजबूत ,
बिखरी पन्खुड़ियाँ से फूल बने , कुछ बात बने ।
हवाओं में नफरत का जहर अब बहुत घुल चुका ,
फिजाओं में नेकी की खुशबू घुले , कुछ बात बने ।
"जय कुमार 07/03/2014
मिल जुल कर रहे हम तब , कुछ बात बने ।
कब तक यों अपनो से लड़ोगे मेरे देश वासियोँ ,
उँच नीच की दीवारे टूटे तब , कुछ बात बने ।
गले सदियों से मिलते हम जमाने के सामने ,
जब हमारे दिल मिलें , तब कुछ बात बने ।
तेरे आने पर चेहरा मुस्कराये मन चुप रहता ,
मन के तार खिलखिलाये , तब कुछ बात बने ।
टूटी को जोड़े , जुड़ी को करे हम और मजबूत ,
बिखरी पन्खुड़ियाँ से फूल बने , कुछ बात बने ।
हवाओं में नफरत का जहर अब बहुत घुल चुका ,
फिजाओं में नेकी की खुशबू घुले , कुछ बात बने ।
"जय कुमार 07/03/2014
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