Friday, 14 March 2014

कुछ अलग किया जाए ।

अबकी होली यारोअब  , कुछ अलग किया जाए ।
रंगों का उपहार किसी मजलूम को दिया जाए ।

अपनी कोठी के दरवाजे सब खोलकर रख देँ ,
ऐसा दिल अल्लाह अब सभी को दिया जाए ।

किसी मजबूर का , फायदा ना उठा पाये अब कोई ,
आग बड़ चुकी , मेरे मौला अब इंसाफ किया जाए ।

सदियों से झेलते रहे कहर जमाने की रवायत का ,
वक्त बहुत बढ़ चुका अब तो जायजा लिया जाए ।

किसी को सुख महलों , किसी को झोपड़ी नहीँ ,
अब मानव भाग्य लकीरों को ना दिया जाए ।

किसी दुनिया में तो घर तेरा भी होगा मेरे रब
घर उजड़ता उसके दर्द को अब समझ लिया जाए ।

"जय कुमार" 13/03/2014

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