Thursday, 13 March 2014

गर्मी में बसकारो

गर्मी में बसकारो लग गयो ,
का करईंयाँ है भगवान ।

ओरे  गिर रये पानी गिर रओ ,
रो रओ भैया आज किसान ।

मसूर सड़ रई चना सड़ रयो ,
गेंहू अब हो गयो बेजान ।

खेतन की हालत जा देखत ,
हमरे निकरे जायें प्राण ।

दद्दा रो रये बऊ सोई रो रई ,
भैया कैसे खैहे अब ज्ञान ।

सोयाबीन सोई नई निकरो ,
खेरमाई काय बैठी अंजान ।

मोढ़ी को ब्याव है करने ,
मँहगाई से अब जाबे जान ।

आशमान से आफत गिर रई ,
धरती हो रई है बेजान ।

कछु रहम भोले
 ने आबे  ,
जहर बरसा रये जानईं जान

किसान की पगड़ी है चरणो में,
रहम करों अब भगवान ।


"जय कुमार" 10/03/2014

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