गर्मी में बसकारो लग गयो ,
का करईंयाँ है भगवान ।
ओरे गिर रये पानी गिर रओ ,
रो रओ भैया आज किसान ।
मसूर सड़ रई चना सड़ रयो ,
गेंहू अब हो गयो बेजान ।
खेतन की हालत जा देखत ,
हमरे निकरे जायें प्राण ।
दद्दा रो रये बऊ सोई रो रई ,
भैया कैसे खैहे अब ज्ञान ।
सोयाबीन सोई नई निकरो ,
खेरमाई काय बैठी अंजान ।
मोढ़ी को ब्याव है करने ,
मँहगाई से अब जाबे जान ।
आशमान से आफत गिर रई ,
धरती हो रई है बेजान ।
कछु रहम भोले ने आबे ,
का करईंयाँ है भगवान ।
ओरे गिर रये पानी गिर रओ ,
रो रओ भैया आज किसान ।
मसूर सड़ रई चना सड़ रयो ,
गेंहू अब हो गयो बेजान ।
खेतन की हालत जा देखत ,
हमरे निकरे जायें प्राण ।
दद्दा रो रये बऊ सोई रो रई ,
भैया कैसे खैहे अब ज्ञान ।
सोयाबीन सोई नई निकरो ,
खेरमाई काय बैठी अंजान ।
मोढ़ी को ब्याव है करने ,
मँहगाई से अब जाबे जान ।
आशमान से आफत गिर रई ,
धरती हो रई है बेजान ।
कछु रहम भोले ने आबे ,
जहर बरसा रये जानईं जान
किसान की पगड़ी है चरणो में,
रहम करों अब भगवान ।
किसान की पगड़ी है चरणो में,
रहम करों अब भगवान ।
"जय कुमार" 10/03/2014
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