तुमसे मिलकर मुझको सुकून जो मिलता था ।
दिल की गहराई मेँ कोई फूल जो खिलता था ।
आज भी याद करता , वो तेरी मासूम बातेँ ,
जब कभी तू मेरा बनकर , मुझसे मिलता था । ।
कल ही कि बात जब , मेरा हमराह दोस्तो ,
झगड़गर मुझसे ही , जब वो गले मिलता था ।
आया कोई तूफान , फिर्क किसको थी दोस्तो ,
जब महबूब की आँखों में , नेक प्यार पलता था
किसको खबर थी तब यारो , लाजो -शर्म की ,
मुहब्बत का जज्वात , जब दिल में मचलता था ।
लूट लेता पहले मुझको , हिज्र आग में जलाया ,
दिल की नगरी में ,जब कोई लुटेरा पलता था ।
"जय कुमार" 09/03/2014
दिल की गहराई मेँ कोई फूल जो खिलता था ।
आज भी याद करता , वो तेरी मासूम बातेँ ,
जब कभी तू मेरा बनकर , मुझसे मिलता था । ।
कल ही कि बात जब , मेरा हमराह दोस्तो ,
झगड़गर मुझसे ही , जब वो गले मिलता था ।
आया कोई तूफान , फिर्क किसको थी दोस्तो ,
जब महबूब की आँखों में , नेक प्यार पलता था
किसको खबर थी तब यारो , लाजो -शर्म की ,
मुहब्बत का जज्वात , जब दिल में मचलता था ।
लूट लेता पहले मुझको , हिज्र आग में जलाया ,
दिल की नगरी में ,जब कोई लुटेरा पलता था ।
"जय कुमार" 09/03/2014
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