Friday, 7 March 2014

वो चेहरा दागदार

बेपर्दा हो गया आज , वो चेहरा दागदार ।
बेसुरा हो गया आज , वो गीत रागदार ।
खो गया कहीं आज , वो पुराना आलम ,
जब सामने आया आज , वो सितमगार ।

चलता रहा नाटक , नकाब के पीछे ।
चलती रही छुरियां , सीने के पीछे ।
रोता रहा दिल , गरम आँसुओं तले 
पलते रहे सपोले , मेरी नाक नीचे ।

करता रहा भरोसा , अपना बनाकर ।
सोता रहा हमेशा , सपनो में बसाकर ।
पाता रहा सुकून , फरेब की बातो से ,
तड़पता हर पल , उसे रुह में बिठाकर ।

मुकाम मुमकिन नहीं , मेरा दर्द जमाना ।
जीवन जीता नहीं , साँसो का फसाना ।
सबको होता मेरे , होने का यकीन यहाँ ,
होता होता नहीं , बस आँखो का बौराना ।

जय कुमार" 04/03/2014

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