शब्दों से तीर चलाता हूँ ।
शब्दों से नीर बहाता हूँ ।।
शब्दों से नीर बहाता हूँ ।।
मैं प्यार को शब्दों में लिखूँ ,
शब्दों से गीत बनाता हूँ ।
शब्दों में अहसास ह्रदय के ,
शब्दों से मीत रिझाता हूँ ।
शब्दों से मीत रिझाता हूँ ।
शब्द प्रेम की अनूभूति है ,
शब्दों से प्रीत बढ़ाता हूँ ।
शब्दों की माला गूंथू मैं ,
सुन्दर सी रचना लाता हूँ ।
अंतस में जब भाव उमड़ते ,
शब्दों से खूब सजाता हूँ ।
चलते फिरते हरपल ही मैं ,
शब्दों का जाम पिलाता हूँ ।
भाव किसी के पडकर के मैं ,
शब्दों में उन्हे बताता हूँ ।
भाव ह्रदय कागज पे लिखूँ ,
अजय प्रेरणा बन जाता हूँ ।।
"जय कुमार"16/09/15
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