Thursday, 17 September 2015

शब्दों से तीर

शब्दों  से  तीर  चलाता  हूँ ।
शब्दों  से  नीर   बहाता  हूँ ।।

मैं प्यार को  शब्दों में लिखूँ ,
शब्दों  से  गीत  बनाता  हूँ ।

शब्दों में अहसास ह्रदय के ,
शब्दों  से  मीत  रिझाता हूँ ।

शब्द  प्रेम  की  अनूभूति है ,
शब्दों  से  प्रीत  बढ़ाता  हूँ ।

शब्दों  की  माला  गूंथू   मैं ,
सुन्दर सी  रचना लाता हूँ ।

अंतस में जब भाव उमड़ते ,
शब्दों से  खूब  सजाता  हूँ ।

चलते फिरते हरपल ही मैं  ,
शब्दों का जाम पिलाता हूँ ।

भाव किसी के पडकर के मैं ,
शब्दों  में  उन्हे  बताता   हूँ ।

भाव ह्रदय  कागज पे लिखूँ ,
अजय प्रेरणा  बन  जाता हूँ ।।

"जय कुमार"16/09/15

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