Saturday, 12 September 2015

काल की डाल पर

काल की डाल पर घौंसले बनाने थे ।
दरदरे जख्मों पर मरहम लगाने थे ।
रफ्तार तेज रही हयात ए सफर की ,
एक वक्त में उम्र के पुष्प खिलाने थे ।
आसमाँ में आफत धरती पे कहर था ,
दलदली राहों पर दो पैर जमाने थे ।
साहिल के बीच भँवर का साथ मिला ,
सदियों के बिछड़े दिन रात मिलाने थे ।
हाथ जल चुके थे होम लगाने में ,
जिम्मेदारियों के चप्पू चलाने थे ।
जय पराजय का साथ रहा जिंदगी भर ,
हाथों में भाले लिए खड़े जमाने थे ।।
"जय कुमार"10/08/15

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