लुटी लुटी हर बस्ती है ।
जान आप की सस्ती है ।।
कोमलता को कुचल रहे
शहरों में जबरजस्ती है ।
जान आप की सस्ती है ।।
कोमलता को कुचल रहे
शहरों में जबरजस्ती है ।
उम्र ए लिहाज भूल रहे
आवारों की ... मस्ती है ।
लज्जा के ..तटबंध टूटते
मिटने वाली .. हस्ती है ।
दीपक की तम से यारी
छेदों वाली .... कस्ती है ।
"जय कुमार"28/08/15
आवारों की ... मस्ती है ।
लज्जा के ..तटबंध टूटते
मिटने वाली .. हस्ती है ।
दीपक की तम से यारी
छेदों वाली .... कस्ती है ।
"जय कुमार"28/08/15
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