कहानी हौंसलों की फिर आज सुनाने आया हूँ ।
लहरों के विपरीत कस्ती मैं बहाने आया हूँ ।
कफन बाँध के चला खुशबू ए मिट्टी के खातिर .
वाजू ए कातिल का दमखम अजमाने आया हूँ ।।
लहरों के विपरीत कस्ती मैं बहाने आया हूँ ।
कफन बाँध के चला खुशबू ए मिट्टी के खातिर .
वाजू ए कातिल का दमखम अजमाने आया हूँ ।।
"जय कुमार"16/08/15
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