मेरी उम्मीद से ज्यादा ,, निकलते गये ।
दर्द , चोट जख्म बन नासूर बनते गये ।
मिटाता रहा खुदको गम मिटाने के लिए ,
नासाज हम हुए गम और सम्बलते गये ।।
दर्द , चोट जख्म बन नासूर बनते गये ।
मिटाता रहा खुदको गम मिटाने के लिए ,
नासाज हम हुए गम और सम्बलते गये ।।
"जय कुमार"24/07/15
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