Saturday, 12 September 2015

अधलिखे गीत

अधलिखे गीत गुनगुनाना चाहते हैं !
खोटे सिक्के हम ,,,चलाना चाहते हैं !!

खूंखार चेहरा ,,,,,,,,,,,आइने में देखते !
मुखौटा जगत को दिखाना चाहते हैं !!

कमजोर को दबाकर मजबूत बनते !
डर को अपने हम,, छुपाना चाहते हैं !!

भीड़ में बैठे बनकर ,,,समाज सेवक !
विज्ञापन अपना ,,,,,कराना चाहते है !!

जंगली कानून,,,,,, शहरों में आ गया !
मजलूम को सब ,,,,,,दबाना चाहते है !!

इसकी टोपी उसके सर रखकर यारो !
होशियारी अपनी ,,,,बताना चाहते है !!

"जय कुमार"

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