हँसने का एक सबब ,
रोने के हजार हुए ।
बनाने का एक जरिया ,
मिटाने के हजार हुए ।
एक को पकड़ले बाँकी
छोड़कर जीवन जी ,
बढ़ने का एक रास्ता ,
लौटने के हजार हुए ।।
रोने के हजार हुए ।
बनाने का एक जरिया ,
मिटाने के हजार हुए ।
एक को पकड़ले बाँकी
छोड़कर जीवन जी ,
बढ़ने का एक रास्ता ,
लौटने के हजार हुए ।।
"जय कुमार"23/07/15
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