Saturday, 12 September 2015

हँसने का

हँसने का एक सबब ,
रोने के हजार हुए ।
बनाने का एक जरिया ,
मिटाने के हजार हुए ।
एक को पकड़ले बाँकी
छोड़कर जीवन जी ,
बढ़ने का एक रास्ता ,
लौटने के हजार हुए ।।

"जय कुमार"23/07/15

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