Saturday, 12 September 2015

भुनसारे सें सकारे से

भुनसारे सें सकारे से ,
काहे उड़ा दई चादरिया ,
मोहे बतादे साँवरिया ।।
आज कछु नौनो नइ लग रओ ।
जियरा मोरो मोसे झगड़ रओ ।
कौन घरी ऐंसी आ गई अब ,
अब काहे छुपावे बाबरिया ।।

मोहे बतादे साँवरिया . .
सोलह श्रृँगार करत तें मोरे ।
जैंसी सजी थी मैं व्याव तोरे ।
लाल चुनरिया फिर उड़ा दई ,
अब काहे सजाबे बाबरिया ।।
मोहे बतादे साँवरिया . .
चार कहार लगे थे डोली में ।
सबई जने भी रोये डोली में ।
गाँव काहे अब बिदाई में आओ ,
अब मोहे सुनादे साँवरिया ।।
मोहे बतादे साँवरिया . .
जब अग्नि संग लये फेरे सात ।
लकड़ियाँ काहे जोर रये आज ।
मोरो संग बस रओ आज लो ,
संग काहे छुड़ावे साँवरिया ।।
मोहे बतादे बाबरिया . .
भुनसारे सें सकारे सें
काहे उड़ा दई चादरिया
मोहे बतादे साँवरिया ।।
"जय कुमार"27/07/15

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