Saturday, 12 September 2015

ताल तलैयाँ

ताल तलैयाँ भर रहे ,,,,,,,, मेघ करें बौछार ।
बन मोती जल बरस के , शीतल करे बयार ।।
हरि चुनरिया ओड़ के , धरा रही मुस्काय ।
रूप बदल पर्वत रहे , नव जीवन को पाय ।।
बीज पड़े खिलने लगे ,,,,,,,, आशा नई जगाय ।
छोड़ चले आलस्य को , नव जीवन खिल जाय ।।
"जय कुमार"23/07/15

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