पीर पराई देख जो , मन ना हुआ उदास ।
ह्रदय नहीं पत्थर वो , पीर नहीं आभास ।।
देश धरम पर ना चले , जीवित भी वो लाश ।
लहू नीर सा बह रहा , जन जीवन वो नाश ।।
ह्रदय नहीं पत्थर वो , पीर नहीं आभास ।।
देश धरम पर ना चले , जीवित भी वो लाश ।
लहू नीर सा बह रहा , जन जीवन वो नाश ।।
करम पथ को छोड़ चले , माँग रहे अधिकार ।
जी रहे उस मानस के , जीवन को धिक्कार ।।
राष्ट धरम सर्वोपरी ,,,,,,, भाषा धरम न जात ।
एक ध्वज के नीचे खड़े , एक गीत वो गात ।।
"जय कुमार"12/08/15
जी रहे उस मानस के , जीवन को धिक्कार ।।
राष्ट धरम सर्वोपरी ,,,,,,, भाषा धरम न जात ।
एक ध्वज के नीचे खड़े , एक गीत वो गात ।।
"जय कुमार"12/08/15
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