नयी खोजो डगर आज रे ।
नई तो बच हे ने लाज रे ।।
जमीन के भये बटवारे ।
गाँव सुकड़े शहर पसारे ।
गाँव से हो रयो पलायन ,
गाँव के गिर रये साज रे ।।
नई तो बच हे ने लाज रे ।।
जमीन के भये बटवारे ।
गाँव सुकड़े शहर पसारे ।
गाँव से हो रयो पलायन ,
गाँव के गिर रये साज रे ।।
नयी खोजो डगर आज रे . .
आदमन की भीड़ भारी ।
जनता से कुदरत हारी ।
भियाने का हुईये जानो ,
नियोजन की करो बात रे ।।
नयी खोजो डगर आज रे . .
बेटन खो खूब पढ़ा दयो ।
बिटिया को मरवा दयो ।
बिन बेटी सब सूना सूना ,
बिटिया पर हो नाज रे ।।
नयी खोजो डगर आज रे . .
पेड़ काटे बन गये बीहड़ ।
शेर बचे न बचे न गीदड़ ।
कहर काहे बरपा रओ अब ,
प्रकृति पे गिरा ने गाज रे ।।
नयी खोजो डगर आज रे . .
"जय कुमार"27/07/15
आदमन की भीड़ भारी ।
जनता से कुदरत हारी ।
भियाने का हुईये जानो ,
नियोजन की करो बात रे ।।
नयी खोजो डगर आज रे . .
बेटन खो खूब पढ़ा दयो ।
बिटिया को मरवा दयो ।
बिन बेटी सब सूना सूना ,
बिटिया पर हो नाज रे ।।
नयी खोजो डगर आज रे . .
पेड़ काटे बन गये बीहड़ ।
शेर बचे न बचे न गीदड़ ।
कहर काहे बरपा रओ अब ,
प्रकृति पे गिरा ने गाज रे ।।
नयी खोजो डगर आज रे . .
"जय कुमार"27/07/15
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