Saturday, 12 September 2015

आँखों में आज

आँखों में आज नमी क्यों है ।
चाहत में आज कमी क्यों है ।
उलझे उलझे लफ्ज हमारे ,
ये गलतफहमी बड़ी क्यों है ।
रिश्तों में गर्माहट बड़ रही ,
लफ्जों की नदी जमी क्यों है ।
एक रूह दो जिश्म हमारे है ,
शक की दीवार खड़ी क्यों है ।
सूखा सूखा प्यार का वाग ,
जख्म कि दुनिया हरी क्यों है ।।
"जय कुमार"26/07/15

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